
बेलगहना में ईद-मिलाद-उन-नबी पर दिखा अकीदत और भाईचारे का रंग, अंजुमन अहले सुन्नत रजाये मुस्तफा कमेटी ने निकाली भव्य बाइक रैली

जीशान अंसारी की रिपोर्ट,बेलगहना। पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की विलादत की याद में मनाया जाने वाला ईद-मिलाद-उन-नबी का पर्व बेलगहना में इस वर्ष भी अकीदत, मोहब्बत, अमन और इंसानियत के संदेश के साथ मनाया जा रहा है। पर्व को लेकर मुस्लिम समाज में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। मस्जिदों, मदरसों, घरों और मोहल्लों में सजावट के साथ धार्मिक कार्यक्रमों की तैयारियां की गईं। जगह-जगह लंगर, सिन्नी और प्रसाद वितरण की व्यवस्था भी की गई।

इसी क्रम में अंजुमन अहले सुन्नत रजाये मुस्तफा कमेटी बेलगहना के तत्वावधान में बड़े ही हर्षोल्लास और अकीदत के साथ बाइक रैली निकाली गई। रैली में बड़ी संख्या में समाज के लोग शामिल हुए। बाइक रैली बेलगहना मस्जिद से शुरू होकर गंगानगर, बेलवा टिकरा होते हुए वापस बेलगहना चौकी क्षेत्र से गुजरी। इसके बाद रैली डीपरापारा, दारसागर, कंचनपुर, रतखंडी, बरर, पंडरा और पथरा सहित विभिन्न मार्गों से होते हुए वापस बेलगहना मस्जिद पहुंची। रैली के दौरान लोगों में खासा उत्साह दिखाई दिया और पूरा माहौल अकीदत से सराबोर नजर आया।


मोहब्बत, अमन और इंसानियत का संदेश
ईद-मिलाद-उन-नबी केवल खुशी मनाने का अवसर नहीं, बल्कि पैगंबर हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की जिंदगी, उनकी सीरत, उनके बताए हुए रास्ते और इंसानियत के प्रति उनके संदेश को याद करने का महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है।
मुस्लिम समाज के लोग इस दिन अपने नबी की विलादत की खुशी मनाने के साथ-साथ उनके आदर्शों को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लेते हैं। मौलाना ने बताया कि हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को इस्लाम में अंतिम नबी माना जाता है। उनकी जिंदगी इंसानियत, सच्चाई, रहमदिली, न्याय, भाईचारे और जरूरतमंदों की मदद का संदेश देती है। उन्होंने लोगों को आपसी भेदभाव और नफरत से दूर रहकर मोहब्बत, शांति और भाईचारे के साथ रहने की शिक्षा दी।


रबी-उल-अव्वल में मनाया जाता है मिलाद
ईद-मिलाद-उन-नबी आम तौर पर रबी-उल-अव्वल महीने में पैगंबर हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की विलादत की याद में मनाया जाता है। मुस्लिम समाज में 12 रबी-उल-अव्वल को मिलाद मनाने की परंपरा का उल्लेख मिलता है। इस अवसर पर विभिन्न स्थानों पर मिलाद की महफिल, नात-ए-पाक, सलाम और सीरत-ए-मुस्तफा से संबंधित
कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
बेलगहना में भी पर्व को लेकर कई दिनों से तैयारियां चल रही थीं। मस्जिदों और मदरसों में धार्मिक कार्यक्रमों की तैयारी की गई। घरों और मोहल्लों में भी लोगों ने अपनी क्षमता के अनुसार सजावट की और खुशी का इजहार किया।,बाइक रैली के बाद शाम को निकलेगी पैदल रैली अंजुमन कमेटी के सदस्यों ने बताया कि बाइक रैली के बाद शाम के समय पैदल रैली भी निकाली जाएगी। पैदल रैली के दौरान विभिन्न स्थानों पर लंगर और सिन्नी का इंतजाम रहेगा। कमेटी की ओर से बताया गया कि हुजूर हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की विलादत की खुशी में लोगों के बीच सिन्नी प्रसाद का वितरण भी किया जाएगा।
कमेटी के सदस्यों ने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य केवल धार्मिक खुशी मनाना ही नहीं, बल्कि समाज में भाईचारा, प्रेम, शांति और इंसानियत का संदेश पहुंचाना भी है।
जगह-जगह लंगर और सिन्नी की व्यवस्था
ईद-मिलाद-उन-नबी के अवसर पर बेलगहना सहित आसपास के क्षेत्रों में जगह-जगह लोगों के लिए लंगर और सिन्नी की व्यवस्था की गई। कई लोगों ने अपनी ओर से भोजन एवं प्रसाद का इंतजाम कर राहगीरों और जरूरतमंदों के बीच वितरण किया। ऐसे आयोजनों से धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक सेवा और आपसी भाईचारे की भावना भी मजबूत होती है।
नात और सलाम से गूंजा माहौल
मिलाद के दौरान नात-ए-पाक और सलाम की आवाजों से माहौल भक्तिमय और अकीदत से भरा नजर आया। रैली में शामिल लोग पूरे उत्साह के साथ आगे बढ़ते रहे। रैली के रास्ते में आने वाले क्षेत्रों में भी लोगों ने स्वागत किया। मस्जिदों और आसपास के इलाकों में सजावट देखने को मिली।
ईद-मिलाद-उन-नबी के अवसर पर मुस्लिम समाज के लोगों का कहना है कि पैगंबर हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की जिंदगी पूरी मानवता के लिए प्रेरणादायक है। उनके बताए रास्ते पर चलते हुए जरूरतमंदों की मदद करना, पड़ोसियों के साथ अच्छा व्यवहार करना, गरीबों के प्रति संवेदनशील रहना और समाज में शांति कायम रखना इस पर्व के संदेश को सार्थक करता है।
इतिहास और पैगंबर की सीरत से जुड़ा खास दिन,इस्लामी परंपरा में हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का जीवन मानवता के लिए आदर्श माना जाता है। उनके जीवन में सच्चाई, ईमानदारी, सब्र, रहमदिली, न्याय और इंसानियत को विशेष महत्व दिया गया। उनकी सीरत में समाज के कमजोर और जरूरतमंद लोगों की मदद करने तथा लोगों के साथ अच्छे व्यवहार पर जोर मिलता है।इसी कारण ईद-मिलाद-उन-नबी को मुस्लिम समाज में केवल एक उत्सव के रूप में नहीं, बल्कि अपने नबी की जिंदगी और उनकी शिक्षाओं को याद करने के अवसर के रूप में भी देखा जाता है। मिलाद की महफिलों में उनकी सीरत पर चर्चा की जाती है और लोगों को उनके बताए हुए नेक रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित किया जाता है।
कमेटी के सभी सदस्य रहे मौजूद
बाइक रैली और मिलाद कार्यक्रम में अंजुमन अहले सुन्नत रजाये मुस्तफा कमेटी बेलगहना के पदाधिकारी एवं सदस्य सहित बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग मौजूद रहे। आयोजन को लेकर युवाओं में विशेष उत्साह दिखाई दिया। रैली के दौरान व्यवस्था बनाए रखने और कार्यक्रम को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए समाज के लोगों ने भी सहयोग किया। बेलगहना में ईद-मिलाद-उन-नबी का यह आयोजन एक बार फिर मोहब्बत, अमन, भाईचारे और इंसानियत का संदेश देता नजर आया। लोगों ने पैगंबर हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की विलादत की खुशी मनाते हुए उनकी सीरत को याद किया और समाज में आपसी प्रेम एवं सौहार्द बनाए रखने का संदेश दिया।















